Two Line Shayari


बेगुनाह कोई नहीं, राज़ सबके होते हैं,
खुले आसमान के निचे बैठा हूँ …कभी तो बरसात होगी …..
एक बेवफा से प्यार किया हैं तो ज़िन्दगी कभी तो बर्बाद होगी

ज़िन्दगी की हक़ीक़त बस इतनी सी हैं,
की इंसान पल भर में याद बन जाता हैं

पास वो मेरे इतने कि दूरियो का कोई एहसास नहीं,
फिर भी जाने क्यों वो पास होकर भी मेरे पास नहीं

रुकावटें तो सिर्फ ज़िंदा इंसान के लिए हैं
मय्यत के लिए तो सब रास्ता छोड देते हैं

कौन याद रखता हैं गुजरे हुए वक़्त के साथी को
लोग तो दो दिन में नाम तक भुला देते हैं |

गम ए आरज़ू तेरी आह में, शब् ए आरज़ू तेरी चाह में,
जो उजड़ गया वो बसा नहीं, जो बिछड़ गया वो मिला नहीं

मुझे तलाश हैं एक रूह की, जो मुझे दिल से प्यार करे
वरना इंसान तो पेसो से भी मिल जाया करते हैं |

दिल में आने का रस्ता तो होता हैं लेकिन जाने का नहीं…….,,
इसलिए जब कोई दिल से जाता हैं तो दिल तोड़ कर ही जाता हैं

आखिर क्यों बस जाते हैं दिल में बिना इजाज़त लिए ?
वो लोग जिन्हे हम ज़िन्दगी में कभी पा नहीं सकते

गुजरा हैं मोहब्बत में कुछ ऐसा भी ज़माना
रूठा हूँ अगर तो मनाया था हमे भी किसी ने

चले जायेंगे एक दिन तुझे तेरे हाल पर छोड़कर
कदर क्या होती हैं प्यार की तुझे वक़्त ही सीखा देगा

जब लगा सीने पे तीर तब हमे इतना दर्द नहीं हुआ …..ग़ालिब
ज़ख्म का एहसास तो तब हुआ जब कमान अपनों के हाथ में दिखी
दोस्त हो या दुश्मन ताल्लुक बस इतना ही रहे
बदले की भावना कभी अपने मन में ना रहे….

सच्ची मोहब्बत एक जेल के कैदी की तरह होती हैं
जिसमे उम्र बीत भी जाए तो सजा पूरी नहीं होती |

उड़ जायेंगे तस्वीरों से, रंगो की तरह हम
वक़्त की टहनी पर हैं, परिंदो की तरह हम

रेस वो लोग लगाते है जिसे अपनी किस्मत आजमानी हो,
हम तो वो खिलाडी है जो अपनी किस्मत के साथ खेलते है

कुछ इम्तिहानो को, कुछ जुबानो को, बंद आँखों से सह गए वो
ना कमजोरी थी, ना ही जी हुजूरी थी
बस कुछ मज़बूरी थी जो अपना हर कदम कांटो पर चल गए वो


प्यार में डूब कर देखो, एक अलग ही नजारा हैं
इस चाहत भरी दुनिया में, एक नाम हमारा हैं|

दुखो के बोझ में ज़िन्दगी कुछ इस तरह डूबे जा रही हैं
की मेरी हर एक चाहत, हर एक आस टूटे जा रही हैं|”

किसी ने क्या खूब कहा है
सिर्फ गुलाब देने से अगर मोहब्बत हो जाती,
तो माली सारे ‘शहर’ का महबूब बन जाता…

मत तोल मोहब्बत मेरी अपनी दिल्लगी से….
चाहत देखकर मेरी अक्सर तराज़ू टूट जाते है

रूठे हुए को मनाना तो दस्तूर-ए-दुनिया…..,
पर रूठे की मानना क्यों नहीं सीखती दुनिया

पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में,
नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आँसू पूरी किताब है…!!



छोटा बनके रहोगें तो, मिलेगी हर बड़ी रहमत दोस्तों
बड़ा होने पर तो माँ भी, गोद से उतार देती है……..!!

मुकाम वो चाहिए की जिस दिन भी हारु ,
उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो
रोज ढलता हुआ सूरज कहता है मुझसे,
आज उसको बेवफा हुए एक दिन और बीत गया ।

फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ “इश्क” मुकम्मल,
इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है….!!


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